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Uttar Pradesh Rural Self-Employment, Livestock, Organic Agriculture & Micro Enterprise Development Mission.

Uttar Pradesh Rural Self-Employment, Livestock, Organic Agriculture & Micro Enterprise Development Mission.
उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य होने के साथ-साथ कृषि, पशुपालन, ग्रामीण श्रमशक्ति, पारंपरिक कौशल, महिला स्वयं सहायता समूहों, कुटीर उद्योगों तथा सूक्ष्म उद्यमों की दृष्टि से अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है। राज्य की एक बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है और प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कृषि, पशुपालन, लघु व्यवसाय, दैनिक श्रम, पारंपरिक व्यवसाय एवं असंगठित आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर है। इसके बावजूद ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, किसानों, पशुपालकों, बेरोजगार व्यक्तियों एवं छोटे उद्यमियों के समक्ष आज भी स्थायी आय, व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, बाजार संपर्क, वित्तीय साक्षरता, उद्यम प्रबंधन तथा आधुनिक विपणन से जुड़ी अनेक व्यावहारिक चुनौतियाँ मौजूद हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाएँ पर्याप्त होने के बावजूद अनेक इच्छुक व्यक्ति केवल इस कारण अपना व्यवसाय प्रारंभ नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें सही व्यवसाय के चयन, स्थानीय संसाधनों के उपयोग, परियोजना लागत निर्धारण, व्यवसाय योजना तैयार करने, आवश्यक दस्तावेजों, प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी, उत्पाद गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, डिजिटल विपणन, लेखा प्रबंधन, बाजार संपर्क और व्यवसाय संचालन के संबंध में समन्वित सहायता उपलब्ध नहीं हो पाती। इसी प्रकार अनेक छोटे उद्यम प्रशिक्षण अथवा प्रारंभिक स्थापना के बाद उचित मार्गदर्शन और बाजार के अभाव में स्थायी रूप से विकसित नहीं हो पाते।
कृषि क्षेत्र में भी केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों, स्थानीय स्तर पर कृषि-आधारित उद्यमों, फसलोपरांत प्रबंधन, प्राथमिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, सामूहिक विपणन तथा बाजार संपर्क से जोड़ना आवश्यक है। यदि कृषि उत्पादन को स्थानीय प्रसंस्करण, ग्रामीण सूक्ष्म उद्योग, किसान समूहों, स्वयं सहायता समूहों और बाजार-आधारित उद्यमिता से जोड़ा जाए, तो ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त एवं विविधीकृत आय के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है। डेयरी, बकरी पालन, ग्रामीण पोल्ट्री, चारा उत्पादन, साइलेज, पशुधन आधारित सूक्ष्म उद्यम, गोबर एवं जैविक अपशिष्ट से उपयोगी उत्पाद निर्माण तथा पशुपालकों के लिए उद्यम प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएँ उपलब्ध हैं। किन्तु इन गतिविधियों को केवल पारंपरिक जीविकोपार्जन तक सीमित रखने के बजाय प्रशिक्षण, लागत प्रबंधन, वैज्ञानिक पद्धतियों, रिकॉर्ड प्रबंधन, जोखिम नियंत्रण, बाजार संपर्क और उद्यमिता के साथ जोड़ना आवश्यक है।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए Shweta Shiksha Samiti (SSS Foundation) द्वारा “उत्तर प्रदेश ग्रामीण स्वरोजगार, पशुपालन, जैविक कृषि एवं सूक्ष्म उद्यम विकास मिशन” प्रस्तावित किया गया है। मिशन का उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को केवल जागरूक करना नहीं, बल्कि उन्हें “जागरूकता से प्रशिक्षण, प्रशिक्षण से उद्यम स्थापना, उद्यम स्थापना से बाजार संपर्क और बाजार संपर्क से स्थायी आय” की एक व्यवस्थित विकास प्रक्रिया से जोड़ना है।
यह मिशन प्रथम चरण में पाँच वर्षों की अवधि के लिए प्रस्तावित है। इसका क्रियान्वयन चरणबद्ध, क्षेत्र-विशिष्ट, आवश्यकता-आधारित और परिणामोन्मुखी पद्धति से किया जाएगा। मिशन के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के चयनित जनपदों, विकासखंडों, ग्राम पंचायतों और ग्रामीण क्लस्टरों में स्थानीय सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों, कृषि एवं पशुधन संरचना, बाजार की मांग, पारंपरिक कौशल, महिला सहभागिता, युवाओं की रुचि तथा संभावित उद्यम अवसरों का अध्ययन कर उपयुक्त गतिविधियों का चयन किया जाएगा।
मिशन का मूल सिद्धांत यह होगा कि प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक समान स्वरोजगार मॉडल लागू करने के बजाय “स्थानीय संसाधन + स्थानीय कौशल + स्थानीय मांग + उपयुक्त तकनीक + बाजार संपर्क” के आधार पर उद्यम विकास किया जाए। उदाहरण के लिए किसी क्षेत्र में डेयरी एवं चारा आधारित उद्यम अधिक उपयोगी हो सकते हैं, किसी क्षेत्र में जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, मशरूम अथवा मधुमक्खी पालन, जबकि अन्य क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण, मसाला निर्माण, मिलेट उत्पाद, डिजिटल सेवाएँ, महिला गृह उद्योग, कृषि उपकरण सेवा, पैकेजिंग अथवा ग्रामीण ई-कॉमर्स अधिक व्यावहारिक हो सकते हैं।
मिशन के अंतर्गत ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, किसानों, पशुपालकों, बेरोजगार व्यक्तियों, स्वयं सहायता समूहों, किसान समूहों, सूक्ष्म उद्यमियों तथा अन्य पात्र समुदायों को आवश्यकता के अनुसार निम्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा—








श्वेता शिखा समिति' जहाँ हर कदम आत्मनिर्भरता को ओर!
महाराजगंज, वाराणसी, कुशीनगर, औरैया, कन्नौज, मथुरा, कानपुर देहात, सिद्धार्थनगर, बहराइच, मिर्जापुर और गोंडा जनपदों में कार्यरत...
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